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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर सख्त रुख: संसद में पीएम मोदी का स्पष्ट संदेश

पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर Narendra Modi ने मंगलवार को राज्यसभा में बड़ा बयान दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संकट ने भारत के सामने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की पहली प्राथमिकता देश में तेल और गैस की आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना है।
इसके साथ ही फर्टिलाइजर की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय मंत्री समूह का गठन किया है, जो लगातार हालात पर नजर रखेगा और जरूरी फैसले लेगा।
प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार हर संभव प्रयास कर रही है, ताकि इस जंग का असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर कम से कम पड़े।

इससे पहले लोकसभा में भी प्रधानमंत्री ने कहा था कि पश्चिम एशिया का यह संकट भारत के लिए आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय—तीनों स्तरों पर चुनौती बनकर सामने आया है।
हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद है और सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

वहीं, कांग्रेस महासचिव Priyanka Gandhi Vadra ने प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कुछ नया नहीं था।
उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए, ताकि सभी पक्षों की राय सामने आ सके।

पश्चिम एशिया का यह संकट अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर असर डाल रहा है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है।
ऐसे में सरकार की तैयारियों और विपक्ष के सवाल—दोनों पर देश की नजर बनी हुई है।


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