महाराष्ट्र में मतदाता सूची में दोहराए गए नामों को लेकर राज्य चुनाव आयोग द्वारा निर्णायक कदम

आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची में दोहराए गए नामों को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। विभिन्न दलों द्वारा “डुप्लीकेट मतदाताओं” की शिकायतों के बीच राज्य चुनाव अधिकारियों ने अब निर्णायक कदम उठाते हुए ऐसे नामों को अस्थायी रूप से चिह्नित करने का फैसला किया है। यह निर्णय मतदाता सूची की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
राज्य निर्वाचन विभाग ने बताया कि संशोधित मतदाता सूची को बूथ स्तर के अधिकारियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ साझा किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की विसंगति की तुरंत पहचान की जा सके। यह कदम विपक्षी दलों — शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) — की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उठाया गया है। इन दलों ने आरोप लगाया था कि कई विधानसभा क्षेत्रों और नगर निगम वार्डों में एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी ने बताया कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को उन मतदाताओं की सूची साझा करने के लिए कहा गया है जिनके नाम मतदाता सूची में एक से अधिक बार दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में कुछ मामलों में मतदाताओं के नाम एक ही शहर में दो अलग-अलग पतों पर दर्ज मिले हैं, जबकि कुछ नाम शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की सूचियों में पाए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब क्षेत्रीय अधिकारी ऐसे पतों पर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगे, संबंधित मतदाताओं से मुलाकात कर उनके दस्तावेजों की जांच करेंगे और स्थिति की पुष्टि करेंगे। इसके बाद प्रत्येक ऐसे मतदाता को यह विकल्प दिया जाएगा कि वे किस निर्वाचन क्षेत्र में अपना मताधिकार प्रयोग करना चाहते हैं। यह प्रक्रिया पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के साथ-साथ मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। राज्य चुनाव आयोग का यह कदम न केवल चुनावी प्रक्रिया की साख को मजबूत करेगा, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच विश्वास बहाल करने में भी सहायक सिद्ध होगा। महाराष्ट्र में मतदाता सूची को लेकर उठे सवालों के बीच यह कार्रवाई आने वाले चुनावों में पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।



