नासिक कुंभ के लिए 1800 पेड़ काटे जाने का विरोध, लोगों में ग़ुस्सा

प्रयागराज कुंभ मेले के लगभग डेढ़ साल बाद, अक्तूबर 2026 में नासिक में सिंहस्थ कुंभ मेला आयोजित किया जाएगा. इसकी तैयारियां अभी चल रही हैं.
कुंभ मेले के दौरान साधुओं और महंतों के रहने के लिए तपोवन में एक साधुग्राम बनाया जाता है. आगामी कुंभ मेले के दौरान लगभग 1150 एकड़ क्षेत्र में ऐसे ही एक साधुग्राम बनाने की योजना है. तपोवन में नगर निगम के पास करीब 54 एकड़ ज़मीन है. नगर निगम ने वहां विभिन्न प्रजातियों के करीब 1700 पेड़ दोबारा लगाने के संबंध में नोटिस जारी कर आपत्तियां और सुझाव मांगे थे.
इसकी अवधि मंगलवार (18 नवंबर) को समाप्त हो गई. इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की योजना को देखते हुए, न केवल पर्यावरणविदों, बल्कि नागरिकों की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया हुई. सैकड़ों नागरिकों ने आपत्ति जताई. हर स्तर पर इसका कड़ा विरोध हो रहा है. कई बड़े, छायादार और पर्यावरण के लिहाज से अहम पेड़ों पर पीले निशान लगा दिए गए हैं. पर्यावरणविदों ने कहा है कि कई पेड़ इतने पुराने, बड़े और फैले हुए हैं कि उन्हें प्राचीन वृक्ष के रूप में रजिस्टर्ड किया जा सकता है. उनका आरोप है कि ऐसे पेड़ों को काटना न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से बल्कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी ग़लत फ़ैसला होगा.
पर्यावरणविदों का विरोध
ख़बर है कि नगर निगम ने एक नोटिस जारी किया है जिसमें कहा गया है कि इस स्थल पर लगभग 1,800 पेड़ों को काटना होगा. नगर निगम के इस नोटिस में यह भी कहा गया है कि तपोवन में कुछ पेड़ों को फिर से लगाना होगा और कुछ शाखाओं की छंटाई करनी होगी. पर्यावरणविदों और नागरिकों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है.
राज्य सरकार में मंत्री गिरीश महाजन ने भी घटनास्थल का दौरा किया और पर्यावरणविदों से बातचीत की. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “नासिक में वृक्ष प्रेमियों की भूमिका सही है, इसमें कोई संदेह नहीं है, प्रकृति का संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए. लेकिन, हमारे यहां 12 साल बाद कुंभ मेले का आयोजन हो रहा है. दुनिया का ध्यान इस कुंभ मेले पर है. इस बार भीड़ तीन-चार गुना ज़्यादा होगी. पंचवटी में यह जगह साधुग्राम के लिए आरक्षित है. यह सैकड़ों सालों से चली आ रही परंपरा है। यहाँ साधु रहते हैं.”
वो आगे कहते हैं, “कुंभ मेले में अब सिर्फ़ डेढ़ साल बचा है. इन्हें हटाए बिना साधुओं के लिए व्यवस्था संभव नहीं होगी.” उन्होंने यह भी कहा, “एक पेड़ के बदले हम 10 पेड़ लगाएंगे. हमने इसकी ज़िम्मेदारी ली है. लेकिन हम अगला फ़ैसला सबकी बात सुनने के बाद लेंगे, क्योंकि यहां पर साधुग्राम स्थापित करने के अलावा हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है.”
नासिक नगर निगम का स्पष्टीकरण
नासिक महानगरपालिका की अतिरिक्त आयुक्त करिश्मा नायर ने प्रेस नोट जारी कर इस पर स्पष्टीकरण दिया है. उन्होंने कहा, “नगरपालिका की ओर से साधुग्राम में वृक्ष सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है. इसके परिणामस्वरूप 1825 पेड़ों को चिन्हित किया गया है और पेड़ों की कटाई की खबर से नागरिकों में गलतफहमी फैल गई है.” “सबसे पहले, वृक्ष सर्वेक्षण करने के बाद केवल उन पेड़ों को काटा जाएगा जो निर्माण कार्य में बाधा डालेंगे, जो पेड़ 10 वर्ष से कम पुराने हैं. साथ ही छोटी झाड़ियों को काटा जाएगा.” “पुराने पेड़ों को संरक्षित किया जाएगा और यदि 10 वर्ष से कम पुराने पेड़ काटे जाते हैं, तो नियमों के अनुसार नगर निगम पार्क विभाग के माध्यम से समान आयु के उतने ही पेड़ लगाए जाएंगे.” उदाहरण के लिए, अगर कोई 7 साल पुराना पेड़ काटा जाता है, तो 7 नए पेड़ लगाए जाएँगे.
हालाँकि, नागरिकों ने इस स्पष्टीकरण पर भी सवाल उठाए हैं. नागरिकों का कहना है कि कई देशी और पुराने पेड़ों पर भी निशान हैं, ऐसा कैसे संभव है?



