
शक्कर महंगी होने पर अकोला मनपा के विरोधी पक्ष नेता डॉ. जीशान हुसैन ने सरकार को घेरा, गन्ने के इस्तेमाल और एथेनॉल उत्पादन को लेकर जताई चिंता
त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले शक्कर के बढ़ते दामों ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में शक्कर की कीमतों में तेजी के बीच अब सरकार की एथेनॉल नीति पर भी सवाल उठने लगे हैं। अकोला महानगरपालिका के विरोधी पक्ष नेता डॉ. जीशान हुसैन ने सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि गन्ने का इस्तेमाल शक्कर उत्पादन के बजाय बड़े पैमाने पर एथेनॉल बनाने के लिए किया जा रहा है। उनका सवाल है कि जब त्योहारों के दौरान शक्कर की मांग बढ़ती है, तो आम जनता को महंगी शक्कर क्यों खरीदनी पड़ रही है। आखिर सरकार की एथेनॉल नीति को लेकर डॉ. जीशान हुसैन ने क्या सवाल उठाए हैं, आइए पाहूया.
त्योहारों के मौसम से पहले शक्कर के बढ़ते दामों ने घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी मुद्दे को लेकर अकोला महानगरपालिका के विरोधी पक्ष नेता डॉ. जीशान हुसैन ने सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए हैं।
डॉ. जीशान हुसैन का आरोप है कि गन्ने का इस्तेमाल शक्कर उत्पादन के बजाय एथेनॉल बनाने के लिए किए जाने से शक्कर की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि त्योहारों के दौरान जब बाजार में शक्कर की मांग बढ़ती है, तब आम उपभोक्ताओं को महंगी शक्कर खरीदने की नौबत क्यों आ रही है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ घरेलू बाजार में शक्कर की उपलब्धता और आम जनता के हितों का भी ध्यान रखा जाए।
अब शक्कर की बढ़ती कीमतों और एथेनॉल नीति के बीच सरकार क्या कदम उठाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं
त्योहारों के मौसम में शक्कर की बढ़ती कीमतों ने आम जनता की चिंता जरूर बढ़ा दी है। एक तरफ एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति है, तो दूसरी तरफ घरेलू बाजार में शक्कर की कीमतों का सवाल है। अब सरकार के सामने चुनौती है कि एथेनॉल नीति और आम उपभोक्ता के हितों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।



