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काशी के 10 प्राचीन मंदिरों के संरक्षण व जीर्णोद्धार के लिए 17.50 करोड़ रुपये स्वीकृत

वाराणसी : काशी के प्राचीन और प्रमुख 10 मंदिरों के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार के लिए शासन ने 17.50 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इस संबंध में शासन ने पर्यटन विभाग को निर्देशित किया है कि वह उपयुक्त एजेंसी का चयन कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराए, ताकि जीर्णोद्धार कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जा सके।

डीपीआर तैयार करते समय स्थानीय जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों से सुझाव लेने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अधिकतम सुविधाएं मिल सकें। साथ ही मंदिरों तक पहुंचने वाले मार्गों और सड़कों की स्थिति का आकलन कर, जर्जर मार्गों के निर्माण अथवा मरम्मत का कार्य भी कराया जाएगा, ताकि दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

काशी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं पहले ही धरातल पर उतर चुकी हैं, जबकि अनेक योजनाएं प्रस्तावित हैं। इन योजनाओं के अंतर्गत शहर और आसपास स्थित प्राचीन मंदिरों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पर्यटन विभाग को निर्देश दिया गया है कि जीर्णोद्धार के बाद इन मंदिरों को पर्यटन मानचित्र और गाइड बुक में शामिल किया जाए। साथ ही पर्यटन गाइडों को मंदिरों के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी जाएगी, जिससे अधिक संख्या में पर्यटक इन स्थलों तक पहुंच सकें।

पर्यटन से बढ़ेगा रोजगार

पर्यटकों के आगमन से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित मंदिरों के आसपास ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ और होम-स्टे जैसी सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही देशी-विदेशी पर्यटक काशी की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और ग्रामीण जीवनशैली से रूबरू हो सकेंगे, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

इन 10 मंदिरों का होगा जीर्णोद्धार

  • लहरतारा स्थित दुर्गा मंदिर
  • सदर बाजार वाल्मिकी मंदिर
  • भदैनी स्थित सुपार्श्वनाथ जन्मस्थली
  • सिंधोरा स्थित हनुमान मंदिर
  • ग्रामसभा कोटा स्थित खाकी कुटी मंदिर
  • मुड़ादेव स्थित महादेव मंदिर
  • देवरिया पूरे हनुमान मंदिर
  • ग्रामसभा गोला स्थित हनुमान मंदिर
  • जक्खिनी स्थित यक्षणी माता मंदिर
  • नमोघाट स्थित भगवान विश्वकर्मा मंदिर

शासन के इस निर्णय से काशी के धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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