अमरावती नगर निगम की पहली आमसभा 20 फरवरी को, 16 सदस्यीय स्थायी समिति पर लगेगी मुहर

नगर निगम चुनाव 2026 के बाद अब अमरावती शहर की सरकार एक्शन मोड में नजर आ रही है। आगामी 20 फरवरी को 87 पार्षदों वाली अमरावती महानगरपालिका की पहली आमसभा आयोजित की जाएगी। यह सभा महापौर श्रीचंद तेजवानी की अध्यक्षता में होगी, जिसमें 16 सदस्यीय ‘स्थायी समिति’ के गठन को मंजूरी दी जाएगी।
सदन की संभावित तस्वीर पर नजर डालें तो भाजपा के 5, कांग्रेस के 3 तथा NCP, YSP और MIM जैसी पार्टियों का प्रतिनिधित्व दिखाई देगा। वहीं 8 मनोनीत सदस्यों के नाम भी लगभग तय माने जा रहे हैं। खास बात यह है कि सेना (UBT) को छोड़कर अन्य सभी दलों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है।
सवाल पूछने में केवल चार पार्षद आगे
आमसभा की कार्यसूची के अनुसार 87 पार्षदों में से केवल 4— प्रशांत वानखेड़े, चंदू खेडकर, स्वाति कुलकर्णी और मिलिंद बाम्बल— ने प्रश्नकाल में सवाल उठाने की पहल की है। 23 प्रस्तावों में मंगेश मनोहर 7 प्रस्तावों के साथ सबसे अधिक सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सक्रियता शहर की ज्वलंत समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त है?
शहर के सामने गंभीर चुनौतियां
अमरावती इस समय कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। अतिक्रमण से सड़कों की चौड़ाई कम हो रही है, हॉकर्स ने मुख्य मार्गों पर कब्जा जमा रखा है, मनपा स्कूलों की हालत दयनीय बताई जा रही है और अनधिकृत कोचिंग क्लासेस की संख्या लगातार बढ़ रही है।
चिंता की बात यह है कि इन अहम मुद्दों को लेकर नए पार्षदों की कार्यसूची में अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है।
जनता की उम्मीदें और 20 फरवरी की परीक्षा
जनता ने नए चेहरों को इस उम्मीद के साथ चुना है कि वे शहर की तस्वीर और तकदीर बदलेंगे। अब निगाहें 20 फरवरी को होने वाली पहली आमसभा पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि यह बैठक केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है या शहर के विकास की नई दिशा तय करती है।
पार्षदों के लिए विशेष सुझाव: आमसभा में सक्रियता क्यों जरूरी?
1. प्रश्नकाल का प्रभावी उपयोग
30 मिनट का प्रश्नकाल बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि 87 में से केवल 4 पार्षद ही सवाल पूछ रहे हैं, तो यह बाकी सदस्यों की निष्क्रियता को दर्शाता है। हर पार्षद को अपने वार्ड और शहर से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने चाहिए।
2. अध्ययन और शोध आधारित प्रस्ताव
सिर्फ नाली-सड़क तक सीमित रहने के बजाय ‘मास्टर प्लान’, अतिक्रमण नीति, शिक्षा बजट और शहरी विकास योजनाओं पर गहन अध्ययन कर ठोस प्रस्ताव रखने की आवश्यकता है।
3. जनता की आवाज को मंच देना
अतिक्रमण, अवैध कोचिंग क्लासेस, पार्किंग, घुमंतू परिवारों की समस्या जैसे मुद्दे यदि कार्यसूची में शामिल नहीं हैं, तो उन्हें ‘विशेष विषय’ के तहत उठाने का साहस पार्षदों को दिखाना चाहिए।
4. उपस्थिति नहीं, सहभागिता जरूरी
सदन में उपस्थित रहना केवल औपचारिक जिम्मेदारी है, लेकिन चर्चा में सक्रिय भागीदारी ही सच्ची जनसेवा है। नए पार्षदों को ऊर्जा, दृष्टि और जवाबदेही के साथ सदन की गरिमा बढ़ानी होगी।
अब देखना यह है कि अमरावती की यह पहली आमसभा शहर के विकास का रोडमैप तैयार करती है या फिर यह अवसर भी बहस और औपचारिकताओं तक सीमित रह जाता है।



