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साल का पहला चंद्र ग्रहण आज, देश के कई हिस्सों में दिखेगा आंशिक नज़ारा

फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर साल का पहला चंद्र ग्रहण आज दोपहर 3:20 बजे से प्रारंभ हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका सूतक काल सुबह 6:23 बजे से शुरू हो चुका है, जो ग्रहण के मोक्ष यानी समापन तक प्रभावी रहेगा। सूतक काल में शुभ कार्य, पूजा-पाठ, सोना और भोजन करना वर्जित माना जाता है। कई स्थानों पर मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं।

धार्मिक परंपरा के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले लग जाता है। इसी कारण आज सुबह से ही श्रद्धालु विशेष सावधानी बरत रहे हैं। सूतक के दौरान भोजन नहीं बनाया जाता और यदि पहले से बना हुआ भोजन, दूध या जूस रखा हो तो उसमें तुलसी के पत्ते या कुश डालने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे ग्रहण का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। हालांकि रोगी, वृद्ध, बालक और गर्भवती महिलाओं को इसमें छूट दी गई है। स्वस्थ लोगों को इस समय भोजन से परहेज करने की सलाह दी जाती है, जबकि आवश्यकता पड़ने पर फल और पेय पदार्थ ग्रहण किए जा सकते हैं।

पौराणिक मान्यता

पौराणिक कथाओं के अनुसार चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण राहु और केतु के कारण लगते हैं। यह कथा भागवत पुराण और महाभारत में वर्णित समुद्र मंथन प्रसंग से जुड़ी है, जिसमें राहु-केतु द्वारा सूर्य और चंद्रमा को ग्रास करने की कथा मिलती है।

कहाँ-कहाँ दिखेगा ग्रहण?

यह चंद्र ग्रहण भारत के पूर्वी हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जबकि कई अन्य शहरों में आंशिक रूप से नजर आएगा। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में चंद्रोदय शाम 6:45 बजे होगा और यहां केवल 2 मिनट के लिए आंशिक चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। शाम 6:47 बजे ग्रहण का समापन हो जाएगा।

इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, अहमदाबाद, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, पटना, इंफाल, गुवाहाटी, शिलॉन्ग, कोहिमा और ईटानगर में भी यह आंशिक रूप से देखा जा सकेगा।

भारत के अलावा यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी एशिया, उत्तरी अमेरिका, मध्य अमेरिका, प्रशांत महासागर और पश्चिमी दक्षिण अमेरिका में भी दिखाई देगा। हालांकि अफ्रीका और यूरोप में यह नजर नहीं आएगा।

प्रमुख समय

  • चंद्र ग्रहण प्रारंभ: दोपहर 3:20 बजे
  • सूतक काल प्रारंभ: सुबह 6:23 बजे
  • मुंबई में चंद्रोदय: शाम 6:45 बजे
  • चंद्र ग्रहण समापन: शाम 6:47 बजे

श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावधानी बरतें और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस खगोलीय घटना को समझें।

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