Latest NewsMaharashtra

महाराष्ट्र के गन्ना बेल्ट में तेंदुओं का आतंक, 350 से ज्यादा हमले, सरकार ने छेड़ा बड़ा ऑपरेशन

महाराष्ट्र के गन्ना उत्पादन वाले तीन प्रमुख जिलों में इन दिनों तेंदुओं का खौफ चरम पर है। गन्ने के घने खेत अब तेंदुओं का permanant ठिकाना बन चुके हैं, जहां से वे लगातार ग्रामीणों पर जानलेवा हमले कर रहे हैं। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि ग्रामीण अब दिन में भी गले में नुकीली कीलों वाले सुरक्षात्मक पट्टे पहनकर घर से बाहर निकलने को मजबूर हैं।

गन्ने के खेत बने तेंदुओं का सुरक्षित ठिकाना

पुणे, नासिक और अहिल्यानगर में हजारों हेक्टेयर में हजारों हेक्टेयर में फैली गन्ने की खेती, नहरों और छोटी नदियों ने तेंदुओं को ऐसा अनुकूल वातावरण दे दिया है कि वे अब जंगलों की ओर लौटना ही नहीं चाहते। वन विभाग के अनुसार, कई तेंदुए इन इलाकों में तीन पीढ़ियों से रह रहे हैं।

5 साल में 350 हमले, 170 से अधिक मौतें

पिछले पांच वर्षों में इन तीनों जिलों में तेंदुओं के 350 से ज्यादा हमले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 170 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। केवल पुणे जिले में ही 70 से ज्यादा घटनाएं सामने आई हैं। बीते तीन महीनों में 14 ग्रामीणों की मौत के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

सरकार का बड़ा फैसला, 11 करोड़ का सुरक्षा प्लान

लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए महाराष्ट्र राज्य सरकार ने स्थिति को गंभीर मानते हुए लगभग 11 करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय लिया है। सरकार ने केंद्र से तेंदुओं के बंध्याकरण (Sterilization) की विशेष अनुमति भी प्राप्त कर ली है, ताकि उनकी आबादी को नियंत्रित किया जा सके।

पिंजरे, एआई कैमरे और सायरन से लैस होगा इलाका

प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 200 पिंजरे लगाए जा चुके हैं, जबकि 1,000 नए पिंजरों की खरीद प्रक्रिया जारी है। एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो तेंदुए की गतिविधि पकड़ते ही तेज सायरन बजाकर ग्रामीणों को सतर्क करते हैं।
पकड़े गए खतरनाक तेंदुओं को माणिकडोह रेस्क्यू सेंटर भेजा जा रहा है। कुछ अत्यधिक खतरनाक मामलों में शूट-ऑन-साइट की अनुमति भी दी गई है।

ग्रामीणों को मिला सुरक्षा किट

ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने:

  • नुकीली कीलों वाले गले के पट्टे
  • इलेक्ट्रिक झटका देने वाली टॉर्च
  • और त्रिशूल जैसे डंडे
    वितरित किए हैं। तेंदुआ अक्सर गर्दन पर हमला करता है, इसलिए ये कीलों वाले पट्टे ग्रामीणों की पहली सुरक्षा परत बन गए हैं।

जनजीवन अस्त-व्यस्त, लेकिन राहत की उम्मीद

तेंदुओं के लगातार हमलों ने गांवों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। लोग खेतों में जाने से डर रहे हैं, मजदूरी और खेती प्रभावित हो रही है। हालांकि प्रशासन की नई तकनीकी और सुरक्षा पहल से ग्रामीणों को अब कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद भी बंधी है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button