भारत ने हासिल की बड़ी सैन्य कामयाबी: DRDO ने किया Long Range Glide Bomb ‘गौरव’ का सफल परीक्षण

नई दिल्ली: भारत ने लंबी दूरी से सटीक वार करने की क्षमता में एक और बड़ी छलांग लगाई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी रूप से विकसित Long Range Glide Bomb (LRGB) का सफल परीक्षण किया है। इस ग्लाइड बम को ‘गौरव’ नाम दिया गया है। इसे भारतीय वायुसेना के शक्तिशाली Su-30MKI फाइटर जेट से लॉन्च किया गया।
क्या है Long Range Glide Bomb?
यह एक एयर-टू-सरफेस प्रिसीजन वेपन है, जो हवा से छोड़े जाने के बाद लंबी दूरी तक ग्लाइड कर जमीन पर मौजूद टारगेट को निशाना बनाता है।
DRDO ने इसे दो अलग-अलग वेरिएंट में विकसित किया है, ताकि विभिन्न प्रकार के मिशनों के दौरान इसका उपयोग किया जा सके।
परीक्षण कैसे हुआ?
रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि LRGB का परीक्षण दो चरणों में हुआ:
1. मई 2025 – कैरेज ट्रायल
- Su-30MKI के साथ सुरक्षित इंटीग्रेशन की जाँच
- सभी टेस्ट पॉइंट सफल
2. अगस्त 2025 – रिलीज फ्लाइट ट्रायल
- बम के विमान से अलग होने की क्षमता
- उड़ान के दौरान स्थिर व्यवहार
- गाइडेंस सिस्टम की सटीकता की पुष्टि
इन दोनों परीक्षणों ने स्पष्ट कर दिया कि यह हथियार तकनीकी रूप से पूरी तरह सक्षम है और भविष्य में भारतीय वायुसेना की ताकत को कई गुना बढ़ाएगा।
इसकी खासियतें
- टू-स्टेज डिज़ाइन – ज्यादा दूरी और सटीकता
- Su-30MKI के कई स्टेशनों पर फिट किया जा सकता है
- लंबी दूरी से जमीन पर स्थित टारगेट करने की क्षमता
- मॉडर्न वॉरफेयर के लिए उपयुक्त
- पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित
क्यों महत्वपूर्ण है LRGB?
21वीं सदी में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब ज़मीन के मुकाबले हवाई युद्ध अधिक निर्णायक हो गए हैं।
ऐसे में भारत को ऐसे हथियारों की जरूरत है जो:
- लंबी दूरी से हमले कर सकें
- दुश्मन की पोज़िशन पर त्वरित और सटीक वार कर सकें
- घरेलू स्तर पर निर्मित हों, ताकि देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने
डिफेंस सेक्टर में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर बड़ा कदम
भारत आने वाले वर्षों में फाइटर जेट इंजनों से लेकर मिसाइल, रडार और एयर डिफेंस सिस्टम तक को स्वदेशी बनाने पर जोर दे रहा है।
Long Range Glide Bomb ‘गौरव’ का सफल परीक्षण इसी दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि है।



