प्रभाग १९ साईनगर-अकोली में युवा स्वाभिमान पार्टी का पलड़ा भारी; सामाजिक संगठनों ने खोला समर्थन का पिटारा

अमरावती | अमरावती महानगरपालिका चुनाव २०२६ का रणसंग्राम अब अपने चरम पर है। प्रभाग क्रमांक १९ (साईनगर-अकोली) में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। इस प्रभाग में युवा स्वाभिमान पार्टी के उम्मीदवारों— सचिन ओंकारराव भेंडे, उदय गुलाबराव पर्वतकर और सौ. गौरी अमोल इंगळे— के पक्ष में समर्थन की एक जबरदस्त लहर दौड़ गई है। शहर के प्रतिष्ठित सामाजिक संगठनों और बचत समूहों द्वारा खुले तौर पर दिए गए समर्थन ने चुनावी मुकाबले को पूरी तरह से युवा स्वाभिमान के पक्ष में मोड़ दिया है।
प्रमुख संगठनों ने जताया अटूट विश्वास
प्रभाग १९ के विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने एकजुट होकर युवा स्वाभिमान पार्टी के उम्मीदवारों का हाथ थामा है। समर्थन देने वाले प्रमुख समूहों में शामिल हैं:
- माली समाज के विभिन्न बचत समूह
- संत शिरोमणि रविदास महाराज बचत समूह
- वरिष्ठ नागरिक समूह और गुड मॉर्निंग क्लब
- युवक मित्र मंडल एवं महिला बचत समूह
इन संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने यह निर्णय किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि उम्मीदवारों द्वारा पिछले कई वर्षों से किए गए जमीनी कार्यों और संघर्ष को देखकर लिया है।
“पद पर न होते हुए भी किया संघर्ष”
माली समाज और रविदास महाराज बचत समूह के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सड़कों की जर्जर अवस्था, जलापूर्ति की समस्या, स्वच्छता, सामाजिक भवनों की कमी और श्मशान भूमि जैसे बुनियादी मुद्दों पर सचिन भेंडे और उनकी टीम ने हमेशा आवाज उठाई है। नागरिकों का मानना है कि जो नेतृत्व बिना सत्ता के जनता के लिए लड़ सकता है, वही नगर निगम में पहुंचने के बाद प्रभाग का कायाकल्प कर पाएगा।
महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की निर्णायक भूमिका
इस चुनाव में महिलाओं का समर्थन निर्णायक साबित होने वाला है। प्रभाग की अनेक महिला बचत समूहों ने गौरी अमोल इंगळे के साथ सचिन भेंडे और उदय पर्वतकर के प्रचार की कमान खुद संभाल ली है। सुरक्षा, स्वास्थ्य और पानी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए महिलाएं अब “परिवर्तन” के मूड में हैं। वहीं, वरिष्ठ नागरिकों ने वर्षों से लंबित समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए युवा और ऊर्जावान नेतृत्व को चुनने का संकल्प लिया है।
डगमगाए पारंपरिक राजनीतिक समीकरण
विभिन्न सामाजिक संगठनों के इस संगठित समर्थन ने प्रभाग १९ में स्थापित राजनीतिक दलों के गणित को बिगाड़ दिया है। जहाँ पहले मुकाबले को त्रिकोणीय या द्विपक्षीय माना जा रहा था, वहां अब युवा स्वाभिमान पार्टी एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरी है। जनता का संदेश साफ है—वे अब “दिखावे की राजनीति” के बजाय “काम करने वाले नेतृत्व” को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बढ़ता जनसमर्थन और चुनावी भविष्य
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि समर्थन की यह लहर मतदान के दिन तक और भी मजबूत होगी। सचिन भेंडे, उदय पर्वतकर और सौ. गौरी इंगळे को मिल रहा यह ‘जन-आधारित’ समर्थन इस प्रभाग के चुनावी नतीजों में बड़ा उलटफेर कर सकता है।



