उत्तराखंड: अल्मोड़ा में दर्दनाक बस हादसा, गहरी खाई में गिरी यात्री बस, 7 की मौत

अल्मोड़ा (उत्तराखंड): – उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। द्वाराहाट से रामनगर जा रही एक यात्री बस भिकियासैंण क्षेत्र में विनायक के पास अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस भयावह सड़क हादसे में 7 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जिनमें 4 पुरुष और 3 महिलाएं शामिल हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बस में 17 से 18 यात्री सवार थे। हादसा इतना भयानक था कि मौके पर चीख-पुकार मच गई। पहाड़ी इलाका होने के कारण राहत और बचाव कार्य में भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची राहत टीमें
बस दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, जिला प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो गईं। इसके साथ ही स्थानीय ग्रामीणों ने भी मानवता का परिचय देते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन में बढ़-चढ़कर सहयोग किया।
खाई में गिरी बस से घायलों को बाहर निकालकर एम्बुलेंस के जरिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को बेहतर इलाज के लिए बड़े मेडिकल सेंटरों में रेफर किया गया है।
संकरी और मोड़दार सड़क बनी हादसे की वजह
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह हादसा भिकियासैंण क्षेत्र के शिलापानी के पास हुआ, जहां सड़क बेहद संकरी और मोड़दार है। आशंका जताई जा रही है कि बस चालक अचानक संतुलन खो बैठा, जिससे बस सीधे खाई में जा गिरी। हालांकि, दुर्घटना के सटीक कारणों की जांच जारी है।
मुख्यमंत्री ने जताया दुख, दिए जांच के आदेश
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि सभी घायलों को तुरंत और समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं और अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं।
पहाड़ी सड़कों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह हादसा एक बार फिर उत्तराखंड की पहाड़ी सड़कों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। संकरे रास्ते, तीखे मोड़ और भारी वाहनों की आवाजाही आए दिन ऐसे हादसों को जन्म दे रही है। सवाल यह भी है कि क्या पहाड़ी क्षेत्रों में वाहन चालकों को पर्याप्त और विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है?
प्रशासन और परिवहन विभाग के लिए यह घटना एक कड़ी चेतावनी है कि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।



