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ईरान के मीनाब में स्कूल पर हमले के बाद जनाक्रोश, 150 से अधिक छात्राओं की मौत

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य टकराव के बीच ईरान के होर्मोज़गान प्रांत स्थित मीनाब गर्ल्स प्राइमरी स्कूल पर हुए कथित मिसाइल हमले के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया Press TV के अनुसार, इस हमले में 150 से अधिक स्कूली छात्राओं की मौत हुई है, जबकि करीब 100 लोग घायल बताए जा रहे हैं। मंगलवार को हजारों लोग मीनाब में अंतिम संस्कार जुलूस में शामिल हुए और हमले के विरोध में सड़कों पर उतरे।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और तस्वीरों में बड़ी संख्या में लोग मृत छात्राओं को श्रद्धांजलि देते दिखाई दे रहे हैं। UNESCO ने एक बयान में शिक्षा संस्थानों पर हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत विद्यार्थियों और शैक्षणिक परिसरों को विशेष सुरक्षा प्राप्त है। संस्था ने जोर दिया कि स्कूलों को निशाना बनाना शिक्षा के अधिकार को कमजोर करता है और बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालता है।

संयुक्त राष्ट्र से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मीनाब स्थित इस स्कूल पर हमले के बाद मृतकों की संख्या लगातार बढ़ी है। हालांकि स्वतंत्र स्रोतों से हताहतों के आंकड़ों की पुष्टि अभी शेष है।

“ऑपरेशन एपिक फ्यूरी/रोरिंग लायन” के बाद बढ़ा संघर्ष

28 फरवरी से शुरू हुए कथित सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी/रोरिंग लायन” के तहत अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों पर हवाई और मिसाइल हमले किए जाने की खबरें सामने आई हैं। बताया गया है कि इन हमलों में सैन्य अड्डों, बैलिस्टिक मिसाइल स्थलों, समुद्री क्षमताओं और कमांड एवं कंट्रोल ढांचे को निशाना बनाया गया।

Fox News की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कांग्रेस को भेजे पत्र में इन हमलों को “अमेरिकी राष्ट्रीय हितों की रक्षा” और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए समुद्री वाणिज्य के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक बताया। पत्र में यह भी कहा गया कि कार्रवाई इस तरह से की गई जिससे नागरिक हताहतों को न्यूनतम रखा जा सके और जमीनी सैनिकों का उपयोग नहीं किया गया।

ईरान की जवाबी कार्रवाई

हमलों के बाद ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों की बात कही है। रिपोर्टों के अनुसार, इज़राइल सहित बहरीन, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन में अमेरिकी हितों से जुड़े ठिकानों पर हमले किए गए, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ गई है।

वैश्विक स्तर पर शांति की अपील

बढ़ते संघर्ष और संभावित व्यापक युद्ध के खतरे को देखते हुए कई विश्व नेताओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने संयम बरतने और तत्काल तनाव कम करने की अपील की है। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है और संघर्ष के जल्द थमने के संकेत स्पष्ट नहीं हैं।

स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है, वहीं मानवीय संगठनों ने नागरिकों, विशेषकर बच्चों और शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग दोहराई है।

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