अमरावती में अपराध की बढ़ती तस्वीर, खुफिया तंत्र पर उठे सवाल

अमरावती
अमरावती शहर में हाल ही में अपराध और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के पूर्व पुलिस आयुक्त अरविंद चावरिया के कार्यकाल में अमरावती को “अपराध नगरी” और “अपराध की राजधानी” जैसे नकारात्मक टैग दिए जाने के बाद उनकी पुलिसिंग कार्यप्रणाली पर आलोचना हुई।
पूर्व आयुक्त के कार्यकाल में शहर के सभी थानों से डीबी स्क्वाड हटा दिए गए थे, साथ ही पुलिस स्टेशन निरीक्षकों के अधिकारों में भी कटौती की गई। इससे स्थानीय स्तर पर निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता कमजोर हो गई। पहले प्रत्येक थाने में मौजूद डीबी स्क्वाड संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखता था, लेकिन इनके हटने से शहर का नियंत्रण मुख्य रूप से अपराध शाखा पर केंद्रित हो गया।
शहर के लगभग 10 थानों का भार अकेली अपराध शाखा पर आ गया, जिसकी कार्रवाई मुख्य रूप से एमडी, गांजा पकड़ने और जुए के अड्डों पर सीमित रही। इस वजह से अवैध धंधे खुलेआम चलने लगे और अपराधियों में पुलिस का डर खत्म हो गया।
भाजी बाजार चौक हत्याकांड में खुफिया तंत्र पर सवाल
हाल ही में भाजी बाजार चौक में हुई हत्या ने खुफिया तंत्र की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कल शाम कुछ युवकों ने पवन पंजाबराव वानखेड़े की धारदार हथियार से हत्या कर दी। मृतक के पुत्र दिलीप वानखेड़े ने दावा किया कि हत्या के लिए 2 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी।
पुलिस उपायुक्त शिवाजी घुगे और क्राइम ब्रांच ने तुरंत घटना स्थल पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। हालांकि, खबर लिखे जाने तक चारों आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। इस मामले में वैभव पत्रे, साहिल हिरपुरकर, सुशील ढोले और शुभम ढोले संदिग्ध के रूप में सामने आए हैं।
जांच में यह भी पता चला कि मृतक पवन वानखेड़े का पूर्व में आपराधिक रिकॉर्ड था और पुराने विवाद के चलते इस वारदात को अंजाम दिया गया।
नए पुलिस आयुक्त के सामने बड़ी चुनौती
अमरावती के नए पुलिस आयुक्त राकेश ओला (IPS) के सामने अब बड़ी चुनौती यह है कि वह शहर में खुफिया तंत्र को मजबूत करें, थानों में डीबी स्क्वाड की पुनर्बहाली करें और स्थानीय स्तर पर अपराध की पूर्व जानकारी पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। शहरवासियों की निगाह अब इस बात पर टिकी है कि क्या नई पुलिसिंग कार्यप्रणाली अमरावती को फिर से सुरक्षित शहर बना पाएगी।



