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अमरावती में पांच दिनों से ठप कचरा संकलन व्यवस्था; शहर कचरे के ढेरों में तब्दील, जिम्मेदारी पर उठे सवाल

अमरावती, महाराष्ट्र — शहर में स्वच्छता व्यवस्था बीते पांच दिनों से पूरी तरह चरमराई हुई है। जगह–जगह कचरे के ढेर लग गए हैं और ‘स्वच्छ अमरावती’ का नारा अब मज़ाक बनकर रह गया है।

अमरावती का ऐतिहासिक परकोट क्षेत्र, जो कभी शहर की पहचान माना जाता था, अब डंपिंग यार्ड जैसा दिखाई दे रहा है। गांधी चौक से तांगा पड़ाव तक कचरे के ढेरों के कारण स्थानीय नागरिकों और राहगीरों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप और बढ़ते प्रदूषण ने लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डाल दिया है।

कचरा संकट के पीछे कौन?

अमरावती शहर का कचरा संकलन कार्य मुंबई स्थित कोणार्क कंपनी के पास है, लेकिन कंपनी पर गंभीर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार—

  • कंपनी के पास पर्याप्त वाहन नहीं हैं
  • सफाई कर्मचारियों की संख्या भी बेहद कम है
  • मजबूरी में कंपनी को भाड़े के वाहन और अस्थायी कर्मचारियों के सहारे ही काम शुरू करना पड़ा

शहर की स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए इस तरह की कमजोर व्यवस्था सवालों के घेरे में है।

मनपा भी कठघरे में

और विडंबना यह है कि परकोट क्षेत्र में मनपा द्वारा लगाए गए ‘कचरा न फेंके — CCTV निगरानी में’ जैसे बोर्ड भी बेमानी साबित हो रहे हैं।
शिकायतें हैं कि मनपा की कटला गाड़ियाँ तक इसी इलाके में कचरा डाल रही हैं, मानो व्यवस्था को खुले तौर पर चुनौती दी जा रही हो।

ऐसे में नगर निगम का स्वच्छता विभाग भी खामोश दिखाई दे रहा है, जिससे नागरिकों में नाराज़गी और भी बढ़ रही है।

आयुक्त सौम्या शर्मा की भूमिका पर निगाहें

स्वच्छता के मामलों में सख्त रुख अपनाने वाली अमरावती मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा अब इस पूरे मामले में केंद्र बिंदु बन गई हैं।
मुख्य सवाल यह है:
क्या आयुक्त नई कचरा संकलन कंपनी कोणार्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगी?
या फिर अमरावती के लोगों को कचरे के ढेरों के बीच ही रहने को मजबूर रहना पड़ेगा?

शहर को चाहिए तुरंत समाधान

नागरिकों का कहना है कि यह समस्या अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है।
ज़िम्मेदार विभागों पर कार्रवाई और ठोस समाधान की मांग लगातार बढ़ रही है।

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