युवा स्पंदन 2025” : अमरावती में युवाओं की कला, संस्कृति और ऊर्जा का प्रेरणादायी संगम

अमरावती, 10 अक्टूबर 2025 –
संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय के विद्यार्थी विकास विभाग द्वारा आयोजित और श्रीमती केशरबाई लाहोटी महाविद्यालय, अमरावती के यजमानत्व में संपन्न हुए “युवा स्पंदन – युवा महोत्सव 2025” का चार दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव आज भव्य समारोप समारोह के साथ संपन्न हुआ।
इस महोत्सव में अमरावती, अकोला, बुलढाणा, वाशीम और यवतमाल जिलों के 195 महाविद्यालयों के हजारों विद्यार्थियों ने भाग लिया। संगीत, नृत्य, नाटक, चित्रकला, वेशभूषा, अभिनय, वादन, लोककला व ललित कला जैसे 28 विभिन्न कलाक्षेत्रों में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता और कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। पूरा परिसर चार दिनों तक सांस्कृतिक ऊर्जा और सृजनात्मकता से जीवंत बना रहा।
समारोप समारोह की अध्यक्षता कुलगुरु डॉ. मिलिंद बारहाते ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में जिलाधिकारी श्री आशिष येरेकर उपस्थित थे। इस अवसर पर प्र-कुलगुरु डॉ. महेंद्र ढोरे, छात्रालय समिति के अध्यक्ष श्री वसंतकुमार मालपाणी, सचिव डॉ. गोविंद लाहोटी, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विजयकुमार भांगडीया, कुलसचिव डॉ. अविनाश असनारे, विद्यार्थी विकास अधिकारी डॉ. राजीव बोरकर सहित कई विशिष्ट अतिथिगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सोनल चांडक ने प्रभावशाली शैली में किया, जबकि पुरस्कार वितरण का संयोजन डॉ. रचना राठी ने किया। स्वागत भाषण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. भांगडीया ने और प्रास्ताविक भाषण डॉ. राजीव बोरकर ने प्रस्तुत किया। समारोप के अंत में डॉ. तिर्थराज राय ने सभी का आभार व्यक्त किया।
कुलगुरु डॉ. मिलिंद बारहाते ने कहा कि “युवा स्पंदन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि यह विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक सृजनशीलता का प्रतीक है। इस मंच के माध्यम से विद्यार्थियों को नेतृत्व, विचार और सृजनशीलता का विकास करना चाहिए।”
मुख्य अतिथि श्री येरेकर ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, “आपकी कला, ऊर्जा और आत्मविश्वास ही नए भारत की पहचान है। ऐसे आयोजन युवाओं को प्रेरणा और नेतृत्व की दिशा प्रदान करते हैं।”
छात्रालय समिति के अध्यक्ष श्री मालपाणी ने बताया कि संस्था इस वर्ष अपने 75वें अमृत महोत्सव में प्रवेश कर रही है, और “युवा स्पंदन” जैसे आयोजन इस गौरवशाली यात्रा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाले हैं।
कार्यक्रम में सभी 28 कलाक्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। विजेताओं के चेहरों पर गर्व और आनंद की झलक स्पष्ट थी। अतिथियों को शाल, श्रीफल और स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
यह महोत्सव न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध रहा, बल्कि इसने युवाओं के मन में आत्मविश्वास और रचनात्मकता का दीप प्रज्वलित किया। “युवा स्पंदन 2025” विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक इतिहास में एक प्रेरणादायी अध्याय के रूप में दर्ज हुआ है।
इस महोत्सव की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि मंच से यह संदेश गया – “कलाकार केवल प्रतियोगी नहीं होता, वह सृजन करता है और समाज को प्रेरणा देता है।”
युवा स्पंदन का यह समापन भले ही कार्यक्रम के रूप में हुआ हो, लेकिन इसकी ऊर्जा और प्रेरणा विद्यार्थियों के मन में लंबे समय तक जीवित रहेगी।



