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तकनीकी नवप्रवर्तन में हिंदी भाषा का महत्वरपूर्ण योगदान

अमरावती – (दि. 26/09/2025) : संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वभविद्यालय के अनुवाद हिंदी विभाग में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी पखवाडा का शुभारंभ किया गया । कार्यक्रम का उद्घाटन मानव विज्ञान विद्याशाखा एवं मराठी विभाग प्रमुख प्रो.डॉ. मोना चिमोटे तथा प्रमुख वक्ता भारतीय जनसंचार संस्था्न के सहयोगी प्राध्यापक एवं संयोजक डॉ. राजेश सिंह कुशवाहा, प्रभारी अनुवाद हिंदी विभाग प्रमुख प्रो. डॉ. माधव पुटवाड इनकी उपस्थित में किया गया।
डॉ.राजेश सिंह कुशवाहा ने अपने अतिथी संबोधन में कहा कि हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में पखवाडा मनाया जाता है, जिसमें छात्रों के लेखन, संभाषण, अभिव्यक्तिकरण और ज्ञानवर्धन के लिए विभिन्न हिंदी प्रतियोगिताओें का आयोजन किया जाता है. जिससे छात्रों में हिंदी के प्रति रूचि निर्माण हो एवं वे हिंदी भाषा प्रस्तुतीकरण में सक्षम हो सके।
उन्होंने आगे कहा कि, हिंदी भारतीय भाषाओं की मिली जुली संवाहिका है जिसमें समग्रता, समरसता अभिग्रहण करने की क्षमता है। सभी भाषाओं के समान हिंदी भाषा को भी सम्मान देना हमारा परम कर्तव्य है. यही कारण है कि हिंदी के विकास में अहिंदी भाषीयों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्तमान साहित्य एक भाषा का नहीं बल्कि बहुभा‍षिक है और विश्व  में भारत ही एकमात्र देश हैं जहा बहुभाषिकता की नींव रखी है। विविधता में एकता का सूत्र पिरोये रखने में अनुवाद एक सशक्त माध्यम है जिससे रोजगार का पथ प्रशस्त हो रहा है। इसलिए वर्तमान में हिंदी का भाषिक स्तर छात्रों में विकसित करना अनिवार्य है। जिससे हिंदी पखवाडा की सार्थकता सिद्ध होगी।
प्रो. डॉ मोना चिमोटे ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि, हिंदी पखवाडा के अतंर्गत विभिन्न प्रतियोगिेताओं का आयोजन किया गया है जिसमें हिंदी निबंध लेखन, शुध्द लेखन,  हिंदी तत्काल भाषण, हिंदी अंताक्षरी, हिंदी प्रश्नमंजुषा, हिंदी अनुवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया है। जिससे छात्रों में हिंदी भाषा का सृजनात्मक लेखन एवं ज्ञानवर्धन हो सके।आगे उन्होने कहा कि भारत के सभी राज्यों  में हिंदी भाषा को सहजता से समझा जाता है। साथ ही तकनीकी क्षेत्र में नवप्रर्वतन को हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार का महत्वपूर्ण घटक माना गया है। तकनीकी क्षेत्र ने केवल हिंदी लेखन के लिए आवश्यक डिजीटल उपकरणों का प्रयोग किया, बल्कि अनुवाद के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहित की है, जैसे मशीनी अनुवाद, ऑडिओ व्हिजुअल स्क्रिप्ट अनुवाद जैसे अनुवाद वैश्विक पाठकों के लिए अधिक सुलभ हुए है। सरकारी कार्यालयो एवं शै‍क्षणिक संस्थाओं के लिए हिंदी भाषा का तकनीकी अनुवाद का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. क्योकि हिंदी साहित्य और सूचना प्रौद्योगिकी को विश्व के हर कोने में सटिकता तथा  भारतीय सामाजिक सांस्कृतिक धरोहर को यथावत संप्रेक्षित करने में हिंदी अनुवाद का नवप्रवर्तन (सृजन) महत्वपूर्ण रहा है। इसी संदर्भ में संत गाडगे बाबा अमरावती विश्व विद्यालय हिंदी अनुवाद विभाग उल्लेखनीय रहा है।
संचालन प्रा.मालती यादव, प्रास्ताविक प्रा.ज्योति जोशी तथा अभार प्रदर्शन डॉ.चंदन विश्वकर्मा ने किया। डॉ.जयश्री बडगे, डॉ.बुंदेले, डॉ.रेखा धूराटे ,प्रा.मनोज सावरकर तथा प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्र, छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में विभाग के कर्मचारी उमाशंकर ठाकूर ने प्रयास किए।

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